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Friday, 1 November 2019

खोखली किस्मत


सोच उस बुनियादी ढांचे का 
या कैद मखमली यादाओं का 
जकड़ गई दुनिया मेरी
बस यही किया तुमने तैय रास्ता ?

बात मैं बता दूं तुम्हे 
ये दुनिया मुझे खाने चली 
नोच- नोच के बोटी मेरी 
फिर मुझे सजाने चली 

कल कोई और था 
तो आज कोई और है 
हाय ! किस्मत मेरी 
मिलता मुझे इसका का मोल है 

कहुँ मैं अब और क्या 
ज़िंदगी मेरी ख़ाक-सी 
दर्द में ही उलझी 
कहानी रात से ही रात की 

इतना सुना, तो सुनो एक और बात 
जमाने ने मुझे कई नाम दिए 
लेकिन आज तक, मेरे नाम बेनाम ही 

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