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Monday, 29 October 2018

वैराग्य

जो जीवन वैरागों से भरा,
वो ही त्याग कहलाता है।
मत्सर में फस कर मानव,
गलत राह ही जाता है।
इच्छाओं को न पूरा कर,
विचलित मन हो आता है।
वैरागी बन के मनुष्य,
न इर्षा, द्वेष और मोह, 
को गले लगता है।
जब देखों वह केवल,
ईश्वर के गुण गाता है।
लोभ-प्रलोभ में न उलझता,
न ही भोगी दुनिया को,
स्वयं का बताता है।
मत्सर में डूबकर,
जीवन व्यार्थ गवाता है।
वैराग्य से मानवीय बोध,
का रास्ता तैयकर जाता है। 

Tuesday, 19 June 2018

ख़ुशी


आज ख़ुशी का एहसास हैं
लग रहा तू मेरे पास हैं
महक गयी मैं
अब तू ही तू बना खास हैं
ना चाहिए मुझे कुछ और
अब हो रही तेरी यादों की बरसात हैं
ख्वाब सज रहे पर ना होती
कोई मुलकात हैं
लेकिन अभी भी
ख़ुशी का एहसास हैं



Thursday, 24 May 2018

सब पाखण्ड

इन फांसी के फंदो में ,
और लटके हुए कंधों में ।
हर गली में, हर शहरों में ,
भूखों में और नंगो में।

मैनें किसको देखा था,
क्या नाम मैनें सोचा था।
किस धर्म का, किस जाति का,
लोग नाम पूछने को आते है।
क्यों वर्ग अनेक नज़र आ जाते है,
क्यों जातपात के नाम पर,
लोग बाटने को आते है।

नेता से लेकर पाखण्ड तक,
केवल जाति-धर्म का धनधा है।
 मस्जिदो में, न मंदिरो में,
मिलता रब का बन्दा है।

लहू-लुहान-सा सब दिखता यहां,
बस दंगा ही दंगा है ।
है सिर कटते ,
है मांग उजड़ती,
न कुछ अब चंगा है।



Sunday, 4 March 2018

कहने को महज़ बात हैं

कहने को बातें महज़ बाते हैं
मैं भी जानती हूं
ये हंसी में छिपे कितने राज हैं
कुछ कही सी कुछ अनकही
न बन के अब रह पाई
हां वो सागर जरूर छूटा है
पर मतलब यह नहीं
कि सागर सूखा है

कहने को महज़ बात है
ये जो चुप रहकर कह जाना था
किसी रिश्ते को बेनाम दे जाना था

कहने को अब होगा नहीं
पर सच पूछो तो
होता ही जा रहा है
वह नाम बेनाम एकनाम
 होता ही जा रहा है


जो कभी खुद के लिए
खड़ी न हो पाती थी
आज समझ लेती
किसी की कई बातें हैं

उसका यूं अब राज छिपाना
ना रास आता है
कहने को महज एक बात है
लेकिन ये बाते अब केवल बात है।।






Wednesday, 14 February 2018

चिराग

 
 
 
प्रकाश देकर आया जन में
किसके अब नाम पर
परिवर्तन कहूं मैं उसको
या क्रांति का नाम दूं
भारत माता के चरणों में
अपना जीवन वार दूं

कभी भगत, तो कभी शिवाजी
नाम बदलते जा रहे
परिवर्तन के नाम पर
चिरग जलते जा रहे

होगी ऐसी रीत
ना सोच पाए वे वीर
आज हम उनकी आहूति
के प्रति नहीं हैं गंभीर
सिमटा दिया उनके बलिदानों को
गली चैराहे दीवारों में
नहीं रख पाए उनके आदर्श
स्वंय के विचारों में, मन में

लौ जाला लो मन में
चिराग जला लो मन में
आज परिवर्तन कि बारी है
क्रांति अब जा़री है
ना नाम भर रह जाये
इसलिए करते हम तैयारी है



The Courage to Be Disliked: A Life-Changing Perspective

The stories of the heart are often unheard by another mind or heart. They remain confined to one's own soul. Understanding o...