Followers

Sunday, 3 February 2019

कौन किसका यहाँ...


कौन किसका यहाँ,
इस संसार में ।
जब क्रोध नाप के चले,
मनुष्य बाजार में।।
सब बिक जाता यहाँ,
वासनारूपी जाल में।
हो रह क्यों यह अनर्थ,
इस व्यपार में।।
हो कामना प्रबल अगर,
विवेक को तु थाम ले।
हाथ जोड़ के तु,
ईश्वर का नाम ले।।
फिर डर किसका है तुझे,
यह संघर्ष भी तेरा है।
कर्म जो तु करता गया,
उसी में सुख-दुख का बसेरा है।।


No comments:

Post a Comment

The Courage to Be Disliked: A Life-Changing Perspective

The stories of the heart are often unheard by another mind or heart. They remain confined to one's own soul. Understanding o...