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Friday, 27 October 2017

ये दुनिया













ये बदलती दुनिया में 
लोग भी ऐसे होते है ,
मतलब के खण्डर में 
अपने सपने सजोते हैं !

कहते ह भरोसा कर 
पर धोखा हमको देते है ,
अहसासों के धागों में
 धोखो के मोती पिरोते हैं !

कहते कटाक्ष ऐसे 
जैसे खुद गंगा से होते है ,
मतलब के खण्डर  में
अपने सपने सजोते हैं !

देख के अनदेखा कर 
वो मन पर घाव देते है ,
मतलब के खण्डर में 
अपने सपने सजोते हैं !
क्यों अपने सपने सजोते ? 

इस दुनिया में लोग भी ऐसे होते है 
मरहम की जगह जख़्मो को सजोते है,
फिर वो पल-पल को रोते है 
इस बदलती दुनिया  में,
लोग भी ऐसे होते है
 मतलब के खण्डर में 
अपने सपने सजोते हैं !

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