है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाएग
सतयुग-त्रेता-द्वापर से चल के कलयुग में आएगा
एक गूंज लगेगी चारों ओर
फिर दानव वेश बदल कर आएगा
लहू-लुहान होगी भूमि
और हर मानव, त्राहि त्राहि चिलगाए
तब नयी विजय गाथा सुनने
नारायण धरती पर आएंगे
है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाएग
वेदों से लेकर मुगलों तक
हाहाकार फैल जाएगा
विक्षिप्त होगी मानव जाति
और जात-पात का तिरंगा फैहर पायेगा
फिर होगी संस्कृति धूमिल
ना धर्म सॉस ले पाएगा
तब अधर्म को हराने
देव दूत, मानवरुप, धर चले आएंगे
है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाएग
अंग्रेजो से आज़ादी
ना विभाजन के बल पर पाएगा
चाहे हिंसा हो या अहिंसा
अपने पुत्रों को, ना गुलाम बतायेगा
स्वयं चोटिल होके भी
दुश्मन का सीना चिर के आएगा
बस यूं ही दानव का
समय पर अन्त हो जाएगा
है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाए
आज़ादी पाकर भी
गरीबों का सर्वस्व खा जाएगा
कभी खून चूस
जमीदारों को मौज़ कराएगा
लेकिन सोच-समझ का दायरा
शिक्षा से खुल जाएगा
और हर बार घर का भेदी, लंक ढ़एगा
है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाए
कृषि-ओद्योग-राजनिती
तीनों का परच फहराएगा
लेकिन समय से साथ
फिर घोर अधेरा छाएगा
जीव-जन्तुओं और प्रकृति का नाश
मानव विनाश का कारण बन जाएगा
सदी बदलने पर भी
इतिहास बदल ना पाएगा
तब अनिति से लोहा ले
मानव विजय रथ को पाएगा
है परिवर्तन की बात अगर
तो इतिहास फिर शोर मचाए
