लोग भी ऐसे होते है ,
मतलब के खण्डर में
अपने सपने सजोते हैं !
कहते ह भरोसा कर
पर धोखा हमको देते है ,
अहसासों के धागों में
धोखो के मोती पिरोते हैं !
कहते कटाक्ष ऐसे
जैसे खुद गंगा से होते है ,
मतलब के खण्डर में
अपने सपने सजोते हैं !
देख के अनदेखा कर
वो मन पर घाव देते है ,
मतलब के खण्डर में
अपने सपने सजोते हैं !
क्यों अपने सपने सजोते ?
इस दुनिया में लोग भी ऐसे होते है
मरहम की जगह जख़्मो को सजोते है,
फिर वो पल-पल को रोते है
इस बदलती दुनिया में,
लोग भी ऐसे होते है
मतलब के खण्डर में
अपने सपने सजोते हैं !



