तू जाम लगा के मदहोश ना हो
मदहोश होके यूं होश ना खो
वायु बन तू बहता चल
ना मदहोश होके गिरता पड़
है मदहोशी का जाम सबसे बड़ा
समझ ज़रा, ना वक़्त गवा
औरों की बातों में क्यूं बहक रहा
विष है ये, क्यूं तू इसे अमृत समझ रहा
क्या मदहोशी है इतनी भली?
जो साथ इसके तू बहक रहा
तू जाम लगा के अब मदहोश ना हो
मदहोश होके यूं होश ना खो
बरसो की मेहनत को तू ,अब खण्डर बना रहा
खुद को सर्वेश्वर कह
दुजो को हीन बता रहा
क्या यही मोल है मेहनत का?
जिसे तू मदहोशी में बह रहा
तू जाम लगा के अब मदहोश ना हो
मदहोश होके यूं होश ना खो
बात है मेरी बड़ी जान सी
अनजान बन, ना होश खो
खोना है तो, उस मदहोशी में खो
जो बलिदान लेकर भी
दे उसका मोल
तू जाम लगा के अब मदहोश ना हो
मदहोश होके यूं होश ना खो
है मदहोशी वो ही भली
जो सब तीतर-बिखर जाना पर भी
समेटे, तुझे तुझमें ही
तू जाम लगा के अब मदहोश ना हो
मदहोश होके यूं होश ना खो।
