क्या है सही-गलत? बिना पूरी बात जाने, लोग अपने मतलब के लिए बातों को कैसे बदल देते है। खासकर इस दौर में जब मिसइन्फोर्मेशन, डिसइन्फोर्मेशन और माल-इन्फोर्मेशन आम है। लेकिन आखिर क्या होते है ये? इनसे आपका क्या रिलेशन?
ऐसा समय जब सबके हाथ मे स्मार्ट फोन है और सोशल मीडिया पर सभी ऐक्टिव, तो इन सवालों का जवाब देना जरूरी हो जाता है। तो आइए जानते है इन सवालों के जवाब।
मिसइन्फोर्मेशन उसे गलत इन्फोर्मेशन को कहते है जो गुमराह करने के लिए फैलाई जाती है। डिसइन्फोर्मेशन या विघटन, वो जानकारी है,जो किसी व्यक्ति, सामाजिक समूह, संगठन या देश को नुकसान पहुंचाने के लिए, गलत और जानबूझकर बनाई जाती है। विशेष रूप से जनता की राय को प्रभावित करने या सच्चाई को छिपना के लिए। अक्सर इसे गुप्त रूप से फैलाया जाता है। आखिर में माल-इन्फोर्मेशन या माल-सूचना, यह वास्तविकता पर आधारित जानकारी का उपयोग कर किसी व्यक्ति, संगठन या देश को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।
सन् 2018 में यूनेस्को द्वारा दी गई रिपोर्ट में इन्हीं बातों पर ध्यान दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से किस तरह गलत जानकारी को लोगों तक पहुँच रही है। यह तक की पत्रकारिता भी इससे अछुती नहीं रह पाई।
कुछ सालों से सभी ने "फके न्यूज़" जैसे शब्दों को बार-बार सुना है और लगातर यह बहस का मुद्दा भी बना रहा है। बात सोचने की है कि विश्वास किस खबर पर करें? कौन-सी न्यूज़ सच्ची है और कौन-सी नहीं ये कैसे जाने? क्या हम भी इसका शिकार हो रहे है और पत्रकारिता का क्या काम इसमें?
देखा जाए तो पत्रकारिता और पत्रकार ही पहला टारगेट होते है इन खबरों का। अगर पत्रकार की समझ विकसित न हो या वह उस विषय से सम्बन्धित जानकारी न रखता हो।
हालांकि, किसी भी खबर को बिना जाँच के नहीं दिखाया जाता। लेकिन जब खबर को बिना जाँच के दिखाया जाए तो सभी लोगों को वही जानकारी पत्रकार के मध्यम से मिलती है। ऐसी स्थिति में बहुत जरूरी हो जाता है फैक्ट को चेक करना और अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखना।
खबरों की जाँच करना जरूरी इसलिए भी हो जाता है क्योंकि आज-कल खबरों को बनाना, किसी पत्रकार के नाम या किसी चैनल नाम पर दिखना या छापना आम हो गया है। ऐसे वक़्त में जरूरी हो जाता है यह जानना कि ये किसने बनाया, किसका उदेश्य क्या है और यह किस तरह का कंटेंट है।
साथ-ही साथ रिपोर्ट में अगल-अगल तरह के इन्फॉर्मेशन पहुँचाने वाले एजेंट, मैसेज की अवधि, किसके पास मैसेज पहुँचाना है। आखिरी में उस मैसेज पर लिया गया ऐक्शन। ये किसी भी दिशा में हो सकते है। चाहे सहयोग के लिए हो या विरोध के लिए। ऐसे में क्या करें?
वास्तव में सोशल मीडिया के दौर में यह प्रक्रिया बहुत तेज़ है। हमें याद रखने की जरूरत है की गलत इन्फॉर्मेशन फैलाने वाले कई है लेकिन उनसे भी ज्यादा है कंज़्यूमर यानी की हम। तो कुछ भी शेयर करने से पहले सोचने की जरूरत है।
तो एक चीज़ देता साथ है। मेरी पास एक ही बात है। हिदायत बहुत आसन है, बस थोड़ा सोचने-समझने का सारा ज्ञान है।

वर्तमान समय की मांग है ये, पत्रकार अगर निष्पक्ष हो तो वो मोदी विरोधी हो जाता है, और फिर यहां पर हमारी बुद्धिमत्ता ही हमारे काम आती है। आपने बहुत ही सही आसान शब्दों में काफी कुछ बता दिया है। धन्यवाद ❤️🙏🙏
ReplyDeletethank you so much. this means a lot.
DeleteVery well written
ReplyDeletethank you
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