संघर्ष ही जीवन का जब एक मात्र रस्ता बच जाता है तो सोचने-समझने में क्यूँ वक़्त गवाना। आखिर कुछ तो मोल होता है संघर्ष का। चाहे गाँव हो या शहर हर जगह एक चीज़ का सामना करना पड़ता है और वह केवल संघर्ष ही है।
आज पांच साल के गंभीर सूखे के बाद भारी बारिश हुई। गाँव के सभी लोग अपने परिवार के साथ जश्न मनाने लगे। इतनी खुशी बीते पाँच सालों में कहाँ मिल पाई थी। ऐसा लगा रहा मानों सारी खुशियाँ आज किसान की झोली में आ गई हो।
दूसरी ओर जब मैं गाँव की बदली हवा को देखती हूं तो बस देखते रहने का ज़ी करता है। सच मानों तो ये बारिश आज उस संघर्ष की कीमत ही तो चुकाने आयी है। साथ-ही-साथ मौसम के बदलने से सबका मिज़ाज ही बदल गया। चारों तरफ पेड़ झूम रहे है और मिट्टी की खुशबू ने तो बचपन की याद ही दिला दी, जब माँ से छिप-छिप के मिट्टी का सवाद चखा जाता था। उफ्फ़! वो दिन, आज याद आ गये।
खैर, यादें तो यादें ही होती है लेकिन इस याद में वो याद भी शामिल जब गावँ में एक अनाज का दाना न था। खर्चे के लिए भी कर्ज़ लेना पड़ता था। सोचने की बात है, जो किसान पूरे देश का पेट भरता था आज उसी का पेट खाली है।
बीते सालों में गाँव के हालात बद से बतर हो गये थे। एक ओर जहाँ खर्चा चल पाना मुश्किल था तो दूसरी ओर खेत रोती थी और वैसे ही रोते थे छोटे बच्चे। जिनका का बचपना खेल-कूद के साथ तो बिता लेकिन खानपान ले साथ नहीं। कई नवजात बच्चों ने दुनिया में आते ही दम तोड़ दिया। किशोरों की हालत भी ज्यादा अच्छी ना थी बस किसी तरह चल रहा था लेकिन आज इस बारिश ने सभी के मन में आश जग दी। वो आश जो कब का दम तोड़ चुकी थी।
खास कर खुशी तो उस किसान को थी जिसे अपने घर का पेट चलना भी मुश्किल था। ये सारी बातें सोचते-सोचते मेरी नज़र पिताजी पर पड़ी जो खुश होते-होते रोने लगे। वह कभी रोते ना थे, कठोर स्वभाव था उनका थोड़ा, लेकिन इस बारिश ने उन्हें रूला दिया। ऐसे पलों में रोना स्वाभाविक भी है।
ये पल ऐसा है जब खुशी और गम का संगम होता हो, एक लम्बी रात के बाद थोड़ी रौशनी दिखाई दी हो, किस बालक को खिलौना मिल गया हो या किसी बुजुर्ग को अपनों का प्यार, सम्मान, सेवा। ये पल ऐसे ही जो संघर्ष के बाद उम्मीद की रौशनी देखती है।

👌👌
ReplyDeletethank you
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